मदरसों को स्कूल न मानना गलत नहीं। किसी भी धार्मिक शिक्षण संसथान को स्कूल नहीं माना जाना चाहिए। न संस्कृत पुरोहित पाठशालाएं,न मदरसे और न अन्य धार्मिक संस्थान। जो लोग इन धार्मिक संस्थाओं की वक़ालत करते हैं,उनके खुद के बच्चे कभी इन संस्थाओं में नहीं पढ़ते। वे अपने बच्चों जो अंग्रेजीदां स्कूलों में पढ़ाते हैं। सिर्फ उन मौलवियों और पुरोहितों के बच्चे धार्मिक स्कूलों में पढ़ते हैं जिन्हें इससे धर्म का धंधा चलाना है। एक धर्मनिरपेक्ष समाज के निर्माण के लिए सभी धार्मिक विद्यालयों की मान्यता रद्द होनी चाहिए और स्कूलों में धार्मिक शिक्षा प्रतिबन्धित होनी चाहिए। चाहे वह किसी भी धर्म से सम्बंधित हो।
বাঙালির সম্পূর্ণ ভূগোল,ইতিহাস,সংস্কৃতি,সাহিত্য, শিল্প,অর্থ,বাণিজ্য,বিশ্বায়ণ,রুখে দাঁড়াবার জেদ, বৌদ্ধময় ঐতিহ্য, অন্ত্যজ ব্রাত্য বহিস্কৃত শরণার্থী জীবন যাপনকে আত্মপরিচয়,চেতনা,মাতৃভাষাকে রাজনৈতিক সীমানা ডিঙিয়ে আবিস্কার করার প্রচেষ্টা এই ব্লগ,আপনার লেখাও চাই কিন্তু,যে স্বজনদের সঙ্গে যোগাযাগ নেই,তাঁদের খোঁজে এই বাস্তুহারা তত্পরতা,যেখবর মীডিয়া ছাপে না, যারা ক্ষমতার, আধিপাত্যের বলি প্রতিনিয়তই,সেই খবর,লেখা পাঠান,খবর দিন এখনই এই ঠিকানায়ঃpalashbiswaskl@gmail.com
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