कठमुल्ला मानसिकता चाहे वह किसी भी समाज के नेतृत्व की हो, अपने मिथ्या गौरव की दुहाई देकर भले ही समाजों को मध्ययुगीन अंधेरी कोठरियों में बन्द करने की सोचे, विश्व संस्कृति की सतत प्रवहमान धाराओं का नित्य नूतन संगम रुकता नहीं है। कोई भी संस्कृति न तो महान होती है और न हेय। संस्कृति, संस्कृति होती है। उनका उद्गम और संगम एक प्राकृतिक परिघटना है।
( मेरी पुस्तक 'आँखिन की देखी' का एक अंश)
বাঙালির সম্পূর্ণ ভূগোল,ইতিহাস,সংস্কৃতি,সাহিত্য, শিল্প,অর্থ,বাণিজ্য,বিশ্বায়ণ,রুখে দাঁড়াবার জেদ, বৌদ্ধময় ঐতিহ্য, অন্ত্যজ ব্রাত্য বহিস্কৃত শরণার্থী জীবন যাপনকে আত্মপরিচয়,চেতনা,মাতৃভাষাকে রাজনৈতিক সীমানা ডিঙিয়ে আবিস্কার করার প্রচেষ্টা এই ব্লগ,আপনার লেখাও চাই কিন্তু,যে স্বজনদের সঙ্গে যোগাযাগ নেই,তাঁদের খোঁজে এই বাস্তুহারা তত্পরতা,যেখবর মীডিয়া ছাপে না, যারা ক্ষমতার, আধিপাত্যের বলি প্রতিনিয়তই,সেই খবর,লেখা পাঠান,খবর দিন এখনই এই ঠিকানায়ঃpalashbiswaskl@gmail.com
Tuesday, July 7, 2015
कठमुल्ला मानसिकता चाहे वह किसी भी समाज के नेतृत्व की हो, अपने मिथ्या गौरव की दुहाई देकर भले ही समाजों को मध्ययुगीन अंधेरी कोठरियों में बन्द करने की सोचे, विश्व संस्कृति की सतत प्रवहमान धाराओं का नित्य नूतन संगम रुकता नहीं है। कोई भी संस्कृति न तो महान होती है और न हेय। संस्कृति, संस्कृति होती है। उनका उद्गम और संगम एक प्राकृतिक परिघटना है।
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