फेसबुक पर या उसके बाहर जितने भी लोग इस वक्त जिंदा हैं उनके जीवन में पहली और अंतिम बार यह मौका आया है, करतार सिंह सराभा की फांसी को इस साल पूरे सौ साल हो गए. भारत खासकर उत्तर भारत से अभी तक मैंने ऐसा कोई समाचार अथवा पोस्ट नहीं देखी जिससे पता चले कि सराभा को किसी ने याद किया है ?
बारहाल हम लोगो ने पिछले इतवार को ब्राम्पटन में एक भव्य समारोह का आयोजन किया था जिसकी रपट यहाँ पढी जा सकती है :
বাঙালির সম্পূর্ণ ভূগোল,ইতিহাস,সংস্কৃতি,সাহিত্য, শিল্প,অর্থ,বাণিজ্য,বিশ্বায়ণ,রুখে দাঁড়াবার জেদ, বৌদ্ধময় ঐতিহ্য, অন্ত্যজ ব্রাত্য বহিস্কৃত শরণার্থী জীবন যাপনকে আত্মপরিচয়,চেতনা,মাতৃভাষাকে রাজনৈতিক সীমানা ডিঙিয়ে আবিস্কার করার প্রচেষ্টা এই ব্লগ,আপনার লেখাও চাই কিন্তু,যে স্বজনদের সঙ্গে যোগাযাগ নেই,তাঁদের খোঁজে এই বাস্তুহারা তত্পরতা,যেখবর মীডিয়া ছাপে না, যারা ক্ষমতার, আধিপাত্যের বলি প্রতিনিয়তই,সেই খবর,লেখা পাঠান,খবর দিন এখনই এই ঠিকানায়ঃpalashbiswaskl@gmail.com
Tuesday, June 23, 2015
फेसबुक पर या उसके बाहर जितने भी लोग इस वक्त जिंदा हैं
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