छोटे पहलवान इमारत के सामने बनी हुई फूलों की क्यारियों पर निगाह डालते रहे। जब प्रिंसिपल ने कहना शुरू किया था कि, ''बैद महाराज भी कभी-कभी ऐसा काम कर बैठते हैं कि क्या बताएं! क्या जरूरत थी इस चुनाव-उनाव की...?'' छोटे पहलवान ने एक कविता कही जो उन दिनों कीर्तन के रूप में काफी प्रचलित थी, ''हमें क्या काम दुनिया से, मेरा श्रीकृष्ण प्यारा है।''
(राग दरबारी)
বাঙালির সম্পূর্ণ ভূগোল,ইতিহাস,সংস্কৃতি,সাহিত্য, শিল্প,অর্থ,বাণিজ্য,বিশ্বায়ণ,রুখে দাঁড়াবার জেদ, বৌদ্ধময় ঐতিহ্য, অন্ত্যজ ব্রাত্য বহিস্কৃত শরণার্থী জীবন যাপনকে আত্মপরিচয়,চেতনা,মাতৃভাষাকে রাজনৈতিক সীমানা ডিঙিয়ে আবিস্কার করার প্রচেষ্টা এই ব্লগ,আপনার লেখাও চাই কিন্তু,যে স্বজনদের সঙ্গে যোগাযাগ নেই,তাঁদের খোঁজে এই বাস্তুহারা তত্পরতা,যেখবর মীডিয়া ছাপে না, যারা ক্ষমতার, আধিপাত্যের বলি প্রতিনিয়তই,সেই খবর,লেখা পাঠান,খবর দিন এখনই এই ঠিকানায়ঃpalashbiswaskl@gmail.com
Friday, January 16, 2015
''हमें क्या काम दुनिया से, मेरा श्रीकृष्ण प्यारा है।''
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