यह पूँजीवाद का वही विजय रथ है जो अपने पीछे न जाने कितनी लाशों, कितनी बर्बादियों और मनुष्य के ख़ून और पसीने का कीचड़ छोड़ता जाता है। सर्वनाशी साबि...
বাঙালির সম্পূর্ণ ভূগোল,ইতিহাস,সংস্কৃতি,সাহিত্য, শিল্প,অর্থ,বাণিজ্য,বিশ্বায়ণ,রুখে দাঁড়াবার জেদ, বৌদ্ধময় ঐতিহ্য, অন্ত্যজ ব্রাত্য বহিস্কৃত শরণার্থী জীবন যাপনকে আত্মপরিচয়,চেতনা,মাতৃভাষাকে রাজনৈতিক সীমানা ডিঙিয়ে আবিস্কার করার প্রচেষ্টা এই ব্লগ,আপনার লেখাও চাই কিন্তু,যে স্বজনদের সঙ্গে যোগাযাগ নেই,তাঁদের খোঁজে এই বাস্তুহারা তত্পরতা,যেখবর মীডিয়া ছাপে না, যারা ক্ষমতার, আধিপাত্যের বলি প্রতিনিয়তই,সেই খবর,লেখা পাঠান,খবর দিন এখনই এই ঠিকানায়ঃpalashbiswaskl@gmail.com
Wednesday, July 5, 2017
गोडसे भक्तों को गांधी का वास्ता : ये मजाक सिर्फ मोदी ही कर सकते हैं
Tuesday, July 4, 2017
Now communal riots in Bengal! Palash Biswas
An 'objectionable' Facebook post about a religious site has triggered communal clashes in West Bengal's North 24 Parganas district, prompting the Centre to rush 300 paramilitary personnel on Tuesday to bring the situation under control.
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee said the clashes broke out between two communities in Baduria of the Basirhat sub-division over the "objectionable" post.
The clashes led to a war of words between the chief minister and Governor Keshari Nath Tripathi. Briefing the media at the state secretariat, Banerjee accused Tripathi of threatening her over phone and alleged that he was acting like a "BJP block president".
"He (Governor) threatened me over phone. The way he spoke, taking the side of BJP, I felt insulted. I have told him that he cannot talk like this," Banerjee told reporters.
"He (the governor) is behaving like a block president of BJP. He should understand that he has been nominated to the post…," she said. "He talked big on law and order. I am not here at the mercy of anyone. The way he spoke to me, I once thought of leaving (the chair)."
Meanwhile, the BJP alleged that over 2000 Muslims attacked Hindu families in the North 24 Parganas district of West Bengal and its offices at several places were set on fire. Accusing the state police of failing to control the situation, party general secretary Kailash Vijayvargiya, who is also in charge of the state, urged Home Minister Rajnath Singh to intervene in the matter.
Several shops were torched and houses ransacked in Baduria, Tentulia and Golabari. On Monday night, a mob attacked Baduria police station and set ablaze several police vehicles.
আহত পুলিশ সুপার, বাদুড়িয়ায় গেল বিএসএফ, আসছে আধা সেনাও
Story image for bengal communal riots from The Indian Express
Communal violence in West Bengal over 'objectionable' Facebook ...
The Indian Express-3 hours ago
Communal violence broke out in North 24 Parganas district of West Bengal on Tuesday over a Facebook post prompting Centre to rush 300 ...
Communal riots in Baduria, West Bengal over objectionable ...
Financial Express-1 hour ago
West Bengal: Communal violence in Baduria over objectionable FB ...
Daily News & Analysis-2 hours ago
Communal riots turn Bengal's Baduria into battlefield, Central forces ...
indiablooms-2 hours ago
Mamata Banerjee says communal violence breaks out in West ...
Zee News-3 hours ago
Mob goes on rampage in Bengal over blasphemous FB post ...
In-Depth-Hindustan Times-2 hours ago
আহত পুলিশ সুপার, বাদুড়িয়ায় গেল বিএসএফ, আসছে আধা সেনাও
ABP Anand Reports
কলকাতা: সাংবিধানিক প্রধানের সঙ্গে রাজ্যের প্রশাসনিক প্রধানের সরাসরি সংঘাত!
যা ঘিরে রাজ্য রাজনীতিতে শোরগোল। চরমে তৃণমূল-বিজেপি চাপানউতোর।
উত্তর ২৪ পরগনার বাদুড়িয়ার একটি ঘটনাকে কেন্দ্র করে ঘটনার সূত্রপাত। পুলিশ সূত্রে খবর, সম্প্রতি ফেসবুকে একটি পোস্ট করে একাদশ শ্রেণির এক ছাত্র। পোস্টে তাদের ভাবাবেগে আঘাত লেগেছে, এই অভিযোগ তুলে রবিবার ওই ছাত্রের বাড়ির সামনে জমায়েত হয় একটি গোষ্ঠী। পুলিশ পদক্ষেপের আশ্বাস দিলে তারা সরে যায়।
৩ জুলাই ভোরে ওই স্কুলছাত্রকে গ্রেফতার করে পুলিশ।
কিন্তু ওইদিনই বাদুড়িয়ার মোড়ে-মোড়ে অবরোধ শুরু করে অপর গোষ্ঠীর লোকজন। দুপুর পর্যন্ত পরিস্থিতি স্বাভাবিক ছিল। কিন্তু বিকেলের দিকে বেশ কিছু জায়গায় দুই গোষ্ঠীর মধ্যে সংঘর্ষ বাধে। অশান্তি ছড়ায় বসিরহাট ও দেগঙ্গার একাংশে।
মঙ্গলবার সকাল থেকে অনন্তপুর, মালতিপুর-সহ একাধিক স্টেশনে অবরোধ শুরু করে একটি গোষ্ঠী। এদিনই, সশস্ত্র মিছিলের অভিযোগকে কেন্দ্র করে উত্তপ্ত হয়ে ওঠে বসিরহাট শহর। সূত্রের খবর, পুলিশের একাধিক গাড়িতে ভাঙচুর করা হয়। অপর গোষ্ঠীর কয়েকজনকে মারধরেরও অভিযোগ উঠেছে।এরপর পরিস্থিতি আরও অশান্ত হয়ে ওঠে। কয়েকটি জায়গায় গুলি-বোমা নিয়ে দুই গোষ্ঠীর সংঘর্ষ হয়। অশান্তির জেরে দীর্ঘক্ষণ থানা থেকে বেরোতে পারেনি বাদুড়িয়ার পুলিশকর্মীরা। ঘটনা সামলাতে গিয়ে উত্তর ২৪ পরগনার পুলিশ সুপার আহত হন।
এই পরিস্থিতিতে, মধ্যমগ্রামের ক্যাম্প থেকে থেকে বাদুড়িয়ায় পৌঁছেছে বিএসএফ।
নবান্ন সূত্রে খবর, কলকাতা পুলিশের একটি টিমও বাদুড়িয়া যাচ্ছে।
হাওড়ার পুলিশের কমিশনারের নেতৃত্বেও একটি দল বাদুড়িয়ার উদ্দেশ্যে রওনা দিয়েছে।
সূত্রের খবর, কেন্দ্র ৩ কোম্পানি আধা সামরিক বাহিনী পাঠাচ্ছে।
Monday, July 3, 2017
घुमक्कड़ छायाकार , प्रसिद्ध यायावर कमल जोशी अपने घर में पंखे से लटके मिले,भयंकर त्रासदी हम तमाम लोगों के लिए! पलाश विश्वास
घुमक्कड़ छायाकार , प्रसिद्ध यायावर कमल जोशी अपने घर में पंखे से लटके मिले,भयंकर त्रासदी हम तमाम लोगों के लिए!
पलाश विश्वास
मन बेहद उदास था।कई दिनों से पढ़ना लिखना बंद सा है।इतना घना अंधेरा दसों दिशाओं में है कि रोशनी की कोई किरण दीख नहीं रही है।अभी अभी फेसबुक खोला तो जगमोहन रौतेला के पोस्ट से पता चला है कि घुमक्कड़ छायाकार , प्रसिद्ध यायावर कमल जोशी जी का आकस्मिक निधन आज 3 जुलाई 2017 को कोटद्वार में हो गया है , वे अपने घर में पंखे से लटके मिले !
हम जिस कमल जोशी को जानते पहचानते हैं,उसके ऐसे दुःखद अंत की कोई आशंका कभी नहीं थी।
गिर्दा जब चले गये, वीरेनदा ने भी जब सांसें तोड़ी,तो इस आशंकित अंत के लिए हम लंबे अरसे से तैयार थे।लेकिन इस हादसे के मुखातिब हो सकने की कोई तैयारी नहीं थी।
पर्यावरण का मुद्दा जन प्रतिरोध का एक मात्र रास्ता है और इस सिलसिले में मैं सविता के साथ 2014 में देहरादून गया था। हमारे आदरणीय मित्र राजीव नयन बहुगुणा हमारे मेजबान थे और चूंकि हमें उनके पिता सुंदर लाल बहुगुणा से मिलना था तो राजीव दाज्यू से ही ठहरने के इंतजाम के लिए कहा था।
कोलकाता से रवानगी से पहले कोटद्वार में कमल दाज्यू को फोन कर दिया था कि आ जाओ,देहरादून। अरसे से नहीं मिले।
इससे करीब दस साल पहले सविता और मैं दिल्ली में बीमार ताउजी को देखने के बाद उधम सिंह नगर में अपने गांव बसंतीपुर के रास्ते बिजनौर में सविता के मायके में ठहरे थे और कमल दाज्यू का आदेश हुआ था, कोटद्वार आ जाओ।हम रवाना होने ही वाले थे कि दिल्ली से भाई ने ताउजी के निधन का समाचार दिया।उऩका पार्थिव शरीर दिल्ली से बसंतीपुर रवाना हो चुका था,तो हम तब कोद्वार जा नहीं सके थे।फिर कभी कोटद्वार जाना नहीं हो सका।सचमुच,हिमालय से कोलकाता की दूरी बहुत ज्यादा है और हम अब भी कोटद्वार पहुंच नहीं सकते।
सविता ने उन्हें देखा तक नहीं था।हम नैनीताल जब भी हम गये, कमल जोशी आगे पीछे निकलते रहे थे।
राजीव नयन दाज्यू और किशोरी उपाध्याय ने गोलकुंडा हाउस में हमारे ठहरने का इंतजाम किया।
रात को दस बजे के करीब भारी बारिश के बीच कमल जोशी हाजिर हो गये।कहा कि राजस्थान के लिए ट्रेन पकड़नी है।
हमने कहा कि कैसे यहां तक पहुंचे।बोले किसी की बाइक ले आया हूं।देर रात तक खूब गप्पे हुईं,,पुराने दिन और पुराने साथियों को याद किया।
सविता से कमल दाज्यू की यह पहली और आखिरी मुलाकात थी।
वे जाने लगे तो मैंने यूंही पूछ लिया, इतने बरस हो गये, इतने बड़े फोटोकार हो,तुमने हमारी कोई तस्वीर नहीं खींची और आज भी कैमरा लेकर नहीं आये।
गर्मजोशी के साथ कमल जोशी बोले,फिर मिलेंगे न,तभी खींचेंगे फोटो।
हमारी कोई तस्वीर खींचे बिना हमारे सबसे प्रिय फोटो कलाकार इस तरह चले गये,यह भी यकीन करना होगा।
विपिन चचा,निर्मल जोशी,निर्मल पांडे का निधन भी असमय हुआ और झटका भी तगड़ा लगा लेकिन उऩमें से किसी ने इसतरह खुदकशी नहीं की थी।
हमारे प्रिय कवि गोरख पांडेय ने भी खुदकशी की थी और हम सभी कमोबेश यह जानते थे कि किन कारणों से ,किन परिस्थितियों में उन्होंने खुदकशी की।
कमल दाज्यू के इस तरह पंखे से लटक जाने की कोई वजह समझ में नहीं आ रही है।
हम जब एमए कर रहे थे,तो कमल जोशी रसायन शास्त्र में शोध कर रहे थे।यूं तो वे शेखर दाज्यू और उमा भाभी के दोस्त थे, लेकिन हम लोगों से दोस्ती करने में उन्होंने कोई देर नहीं लगायी। डीएसबी के कैमिस्ट्री लैब में वे हमेशा दूध चीनी रखते थे।
सर्दी की वजह से हम नैनीताल में गुड़ के साथ चाय पीते थे।लेकिन कैमिस्ट्री लैब में कमल जोशी बीकर को बर्नर पर रखकर चाय बनाते थे और वह चाय हम परखनली में पीते थे।
ऐसी चाय फिर हमने जिंदगी भर नहीं पी।
गिरदा बेहद मस्त और मनमौजी थे।
कमल जोशी की तुलना उन्हीं से की जा सकती है।
दोनों खालिस कलाकार थे।
दोनों पहाड़ का चप्पा चप्पा जानते थे।
फिरभी गिरदा को नापसंद करने वाले लोग कम नहीं थे।लेकिन कमल जोशी को नापसंदकरने वाला कोई शख्स मुझे आज तक नहीं मिला।
अपनी सोच, अपनी सक्रियता और अपनी समझ में भी कमल दाज्यू की तुलना सिर्फ गिर्दा से की जा सकती है।
बरसों पहले उनके पिता घर से निकलकर लापता हो गये और कभी नहीं लौटे।पहाड़ को छानते रहने के बावजूद कमल जोशी की उनसे दोबारा मुलाकात हुई नहीं।
वे नैनीताल छोड़ने के बाद पूरी तरह यायावरी जीवन जी रहे थे और उनकी हर तस्वीर में मुकम्मल पहाड़ नजर आता था।
दुर्गम पहाड़ों के पहाड़ से भी मुश्किल जिंदगी गुजर बसर करने वालों के साथ वे एकात्म हो गये थे।
उनके ख्वाबों,उनकी आकांक्षाओं और उनके संघर्षों के वो जैसे अपने चित्रों में सहेज रहे थे,उन्हें देखकर हम अंदाजा लगाया करते थे कि बंगाल की भुखमरी में चित्र कला मार्फत इतिहास लिखने वाले सोमनाथ होड़ और चित्तप्रसाद जैसे लोग किस तरह चित्र बनाते होंगे।
दिशाएं खोने की वजह से ही शायद ऐसा विक्लप चुनने की सोची होगी कमल दाज्यू ने।
दिशाएं हम लोगों ने भी खो दी हैं।
अब नहीं मालूम कब कहां से इस तरह की खबरें हमारा इंतजार कर रही हैं और पता नहीं ,दिशाएं खो देने की स्थिति में हममें से कितने लोग इस तरह की त्रासदी से अपना जीवन का अंत कर देंगे।
जगमोहन रौतेला ने लिखा हैः
*** दुखद खबर ****
..............................
बड़े दुख और पीड़ा के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि घुमक्कड़ छायाकार , प्रसिद्ध यायावर कमल जोशी जी का आकस्मिक निधन आज 3 जुलाई 2017 को कोटद्वार में हो गया है . वे अपने घर में पंखे से लटके मिले ! एक घुमक्कड़ , यायावर , पहाड़ को बहुत ही नजदीक से जानने समझने , उसके लिए हमेशा चिंतित रहने वाले व्यक्ति का यूँ अचानक से चला जाना बहुत ही पीड़ादायक है . कल ही उन्होंने देर रात को इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक से फोन पर बात की थी . पर कहीं से भी कोई तनाव उनकी बातों में नहीं था . फिर अचानक आज क्या हो गया ? किसी की समझ में कुछ नहीं आ रहा है .
ये क्या किया कमल दा आपने ? क्या कोई भी ऐसा नहीं था जिसे आप अपने मन की कह सकते थे ? क्या इतने सारे मित्रों व शुभचिंतकों के बाद भी आप इतने अकेले थे ? जो पूरे उत्तराखण्ड में हमेशा घुमक्कड़ी करता रहता हो , वह इतना अकेला , बेबस कैसे हो सकता है कमल दा ! क्या कहूँ ? क्या लिखूँ ? समझ नहीं आ रहा है . आप हमेशा याद आवोगे कमल दा !
अलविदा कमल दा ! अलविदा !! और क्या कहूँ ? आखिरी विदाई तो मन मारकर देनी ही पड़ेगी ना आपको !
Sunday, July 2, 2017
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