Wednesday, December 2, 2015

हमउ देखब सूरजवा की औकात कि काहे ना होब भोर! कायनात ह तो कबहुं ना टूटब इंसानियत का डोर! हमउ देखब कौन लाला ललिया घर फूंकन आवै हमार साथ! हमउ देखब कौन लाला ललिया पकड़े हमार हाथ! हमारे हुक्मरान ने जलयुद्ध में भारत को हरा दिया। हमारे हुक्मरान हिमालय हार गये। जुए में हार गये देश हमारे हुक्मरान! हमारी भावी पीढ़ियों के लिए न अन्न है और न जल। अफगानिस्ताम में सोवियत हस्तक्षेप याद है? वहींच ओरिजिनल सिन!पिद्दी समझकर महाबलि सोवियत संघ ने जो अफगानिस्तान में हस्तक्षेप कर दिया तो उसकी कोख से कैसे कैसे जिन्न निकले,बोल जमूरे! पलाश विश्वास

हमउ देखब सूरजवा की औकात कि काहे ना होब भोर!

कायनात ह तो कबहुं ना टूटब इंसानियत का डोर!


हमउ देखब कौन लाला ललिया घर फूंकन आवै हमार साथ!


हमउ देखब कौन लाला ललिया पकड़े हमार हाथ!


हमारे हुक्मरान ने जलयुद्ध में भारत को हरा दिया।

हमारे हुक्मरान हिमालय हार गये।

जुए में हार गये देश हमारे हुक्मरान!


हमारी भावी पीढ़ियों के लिए न अन्न है और न जल।

अफगानिस्ताम में सोवियत हस्तक्षेप याद है?


वहींच ओरिजिनल सिन!पिद्दी समझकर महाबलि सोवियत संघ ने जो अफगानिस्तान में हस्तक्षेप कर दिया तो उसकी कोख से कैसे कैसे जिन्न निकले,बोल जमूरे!


पलाश विश्वास

सेमीनार: असहिष्णुता की चुनौती और सोशल मीडिया hastakshep.com के पांच साल पूरे होने व मानवाधिकार दिवस की पूर्व संघ्या पर


  



  

  


Amalendu Upadhyaya invited you to Insaaf Abhiyan Uttar Pradesh's event



सेमीनार: असहिष्णुता की चुनौती और सोशल मीडिया hastakshep.com के पांच साल पूरे होने व मानवाधिकार दिवस की पूर्व संघ्या पर


Wednesday, December 9 at 3:00am








  



  








सेमीनार: असहिष्णुता की चुनौती और सोशल मीडिया hastakshep.com के पांच साल पूरे होने व मानवाधिकार दिवस की पूर्व संघ्या पर शाम 3 बजे बुद्धवार, 9 दिसंबर 2015 यूपी प्रेस क्लब लखनऊ, उत्तर प्रदेश नागरिक प...






अफगानिस्ताम में सोवियत हस्तक्षेप याद है?


वहींच ओरिजिनल सिन!पिद्दी समझकर महाबलि सोवियत संघ ने जो अफगानिस्तान में हस्तक्षेप कर दिया तो उसकी कोख से कैसे कैसे जिन्न निकले,बोल जमूरे!




अमेरिका को मौका चाहिए था।शीतयुद्ध तेल युद्ध में तब्दील हो गया कि जादू मंतर हो गया और जैसे टूटी सद्दाम की मूर्ति लाइव,वैसे ही टूटि गयो सोवियत संघ।


तालिबान!

अलकायादा!

आइसिस!

हमारे गांव जुआर में कहावत है,पाप ना छोड़े बाप!

तालिबान,अलकायदा और आइसिस का नियोग अमेरिका से जो करवा रहे,उ सोवियत संग है।कर्मफल भी सध गया।


पण जो नर्क रचि दीन्है,दुनिया उसी नर्क में धक धक जल रिया तेलकुंआ है।रूस चीन मिलकर भी भस्मासुर मार ना सकै।उ भस्मासुर इजराइल है।जिसके वध के लिए विष्णु भगवान का चक्र काम ना आई।उ चक्र ससुरा इजराइल भस्मासुर का रक्षाकवच ह।

अमेरिका इजराइल का साझा उपक्रम अरब वसंत अब भारत में वसंत बहार है।हमार कुलो मतलब यहींच।


कल हमने अपने प्रवचन में आर्थिक सुधार के कुलो किस्सा बांचि रहिस।देख लीज्यो।आज इसीलिए मोहलत है।आज प्रवचन नइखै।


1991 में खाड़ी युद्ध में इराक पर जो बमवर्षा हुई रही,वह बमवर्षा इस महादेश के चप्पे चप्पे में हो रही।पाकिस्तानी बिटिया के भखन से हमने पाकिस्तान पेश कर दिया और हिंदुस्तान हमउ वानी।


का मिलल बंटवारे से?

पाकिस्तान में तबाही तो हिंदुस्तान में भी तबाही!

सरहदों के आर पार तबाही और कयामत का मंजर!


सरहदों के आर पार मुहब्बत का कत्लेआम!

सरहदों के आर पार नफरत का अरब वसंत!


सरहदों के आर पार अमेरिकी हितों की बम वर्षा।

सरहदों के आर पार आतंक विरोधी जुध गृहजुध!


सरहदों के आर पार भस्मासुर महाजिन्न जलवा!

सरहदों के आर पार मनुस्मृति शासन घनघोर!


सरहदों के आर पार रंगभेदी वंश वर्चस्व मूसलाधार।

सरहदों के आरपार धर्म के नाम अधर्म अंधकार!



अमेरिका और यूरोप के पाप का घड़ा भर गया है।


आइलान की लाश नहीं थी वह।


वह दरअसल अमन चैन की लाश है।


जो दरअसल लाखोंलाख बह रही हैं समुंदर में ही नहीं,हर मुल्क की सरजमीं पर बह रही हैं लाखोंलाख आइलान की लाशें!


खतरे में है इंसानियत और खतरे में कायनात!


गोर्बाचेव याद हैं!

पेरोस्त्रोइका याद है!


सोवियत संघ की वह हरित क्रांति जिसने वहां कृषि की हत्या कर दी!क्योंकि गोर्बाचेव ने सोवियत संघ को मुक्तबाजार के हवाले कर दिया।अफगानिस्तान में हस्तक्षेप से सोवियत उतना नहीं टूटा जितना ग्लासनोस्त और पेरोस्त्राइका से टूटा।


भारत में फिर वहीं ग्लासनोस्त!

भारत में फिर वहीं पेरोस्त्राइका!

इस पर तुर्रा अरब वसंत हाहाकार।


वीडियो जरुर देख लें।

सबूत विजुअल उसीमें दागे रहे।ग्राफिक ब्यौरे और आंकड़ें,दस्तावेज वहीं हैं क्योंकि आलेख में यह समेटना मुश्किल है।


सबसे खतरनाक यह है कि हम नेपाल को अफगानिस्तान बनाने पर आमादा है क्योंकि सवियत हश्र से हमने कुछ सीखा नहीं है।सच से हमारा वास्ता नहीं है और हमारा धर्म मिथक है तो इतिहास भी हमने मिथकीय बना दिया है,जहां ज्ञान विज्ञान सच का निषेध है।


हमने नेपाल चीन के हवाले कर दिया है और तबतक बहुतै देर हो जायेगी जब हमें पता चलेगाकि पूरा महादेश रेगिस्तान है और हमारी भावी पीढ़ियों के लिए न अन्न है और न जल।

हमारे हुक्मरान ने जलयुद्ध में भारत को हरा दिया।

हमारे हुक्मरान हिमालय हार गये।

जुए में हार गये देश हमारे हुक्मरान!


हमारी भावी पीढ़ियों के लिए न अन्न है और न जल।



टिकट ना कटवाया ह ,तो कटवा लो प्लीज!पहुंच जाव लखनऊ!कुरुक्षेत्र वहींच बनेला ह!महाभारत के खिलाफो हो जौन,जौन हो धर्मोन्मादी कत्लेआम,आत्मघात के विरुध,जौन ह जाति स्थाई बंदोबस्त के मुक्तबाजारी रंगभेदी वंशवर्चस्व के जाति धरम आउर मजहबी सियासत,सियासती मजहब केे विरुध,टिकटवा मिलल कि ना मिलल,पहुंचे जाओ लखनऊ।


सेना हमार भी कम नाही।इत उत भागतड़ा।चरनवाहा कोई नइखे कि मारे डंडा पिछवाड़े कि एइसन पांत में हो जाइ लामबंद फटाक से।तिलिसमवा भी टूटे फिर।अय्यार जो सगरे तलवार भांजे,मू से गू की बरसात करे जौ ससुर,ससुरी,वे तमाम लुंगी उठाइके भागे पिर देखो मदारी का खेल कि जमूरे वाह!


एक सिपाहसालार को आजहुं शुबोशुबो धर लिहिस गरदनवा पकडिके।स्त कलंदर उ आपण यशवंतवा बेधड़क बदमाश!भड़ास पादै रहै जौन खूब।अब जित दखो तित मस्ती खूब कर रिया ह।


गन्ना चूसत ह खेत मा सुसर! हमार करेजा तो धक धक धड़क गियो रे!बाप!का खेल दिखावै हो बाप!हमार बचपन मा दाखिल हुई रहा हमें बतावै बगैर!बदतमीज।ठोंक दिहिस खूब।शुबो सवेरे!

ओ ससुर जो हगैके मूतेकै तमीज भी नइखे,उ सब पाद पादकै गंधा दियो माहौल सगरा आउर हमार अल्टरनेटिव मडिया जहां के तहां!


एफोडीआई का उखाड़ लिहिस!छ महीने जरा वेइट करिके देखो,हमउ उतरैब मैदान मा!फिन देखब तमाशा तो तमासा दिखाइब खूब कि


हमउ देखब सूरजवा की औकात कि काहे ना होब भोर!

कायनात ह तो कबहुं ना टूटब इंसानियत का डोर!

हमउ देखब कौन लाला ललिया घर फूंकन आवै हामर साथ!

हमउ देखब कौन लाला ललिया पकड़े हमार हाथ!


यशवंता वचन दिहिस रहै कि लखनभ पहंचे रहल वानी।सगरे सिपाहसालार पहुंचे रहल वानी।उ कहत रहे,हमउ लड़ब।जान लड़ाये देब।लामबंदी का काफिला ह तइयार।जो ससुरे इत उत भाग रहल वानी गरदन पकिड़ै के हमउ खींचिकै मोरचे पर तान दिब।


हमउ कच्चा खिलाड़ी नाही कहल रहल वानी हमउ के ई चुदुर बुदुर से बदलबे ना कुछो।हमउ तुहार कातिर जो बम एटम बाम बारुद जमा किये रहल वानी,उ फेंके के चाहि ठिकाने पर के हमार भारत,भारत मा हमारे सगरे सगा सगा जो बिरादर तमामो नागरिक ह आम लोग आउर लुगाई जौन,उन तक खबर हो जाई कि जुध ह।

हमउ जो सुर साधल रहल वानी,जो रेयाज तानेरहल वानी,जो गंगा हियां हमार दिल मा बहतड़,दिमाग मा बहतड़ एइसन कि गोमुख होकै गंगासागर तलक गंगास्नान जरुरत ना पड़ी कबहुं।


कह गये संत रैदास कि मन चंगा तो कठौती मा गंगा।उ गंगा हमार दिल मा दिमाग मा।उ कठौती हमउ वानी।उ ससुरी गांगा खतरे मा बा।हिमालय खतरे मा।हम कहत बाड़न कि सुसर पहुंचों लखनऊ के बाद देहरादून।फिन सुंदरलाल बहुगुणा की अंकियन मां झांकेके चाहि।एकच अनंनत इंचरव्यू उनर चिपको आउर हिमालय पर चाहि।हमउ उसका टास्क सार्वनिक कर रहल बाड़न।के हमार दाज्यू राजीव नयन बहुगुणा कुछो कम मस्त कलंदर नइखै।सुर ताल साधेके उ भी संतन कम नइखै।ई कहो कि औघड़ बाबा साक्षात। हमार यशवंत कम नइखे,जानत हो।दुई मिलेकै दक्ष यज्ञ भंग करिकै चाहि आउर बतावेक चाहि के कइसन हिमालय की हत्या रोकेक चाहि ताकि गंगा बहे हमार दिलमा,गंगा बहे हमार दिमागो मा।


हमउ देखब सूरजवा की औकात कि काहे ना होब भोर!

कायनात ह तो कबहुं ना टूटब इंसानियत का डोर!

हमउ देखब कौन लाला ललिया घर फूंकन आवै हामर साथ!

हमउ देखब कौन लाला ललिया पकड़े हमार हाथ!


https://youtu.be/tkefnIAXJds


पाकिस्तान की इस बच्ची ने जो कहा है उसे एक बार जरूर सुनें!#Extension Oil War #Reforms#IMF#World Bank #Mandal VS #Kamandal#Manusmriti

हम उनसे अलग कहां हैं हिंदू राष्ट्र बनकर भी हम क्यों बन गये पाकिस्तान,अमेरिका का उपनिवेश?

वेदमंत्र में हर मुश्किल आसान,हिंदुत्व एजंडा फिर क्यों मुक्त बाजार और सुधार पर  खामोशी क्यों समता और समामाजिक न्याय और हमारे नुमाइंदे क्यों खामोश?

बंगाल में 35 साल के राजकाज गवाँने के बाद कामरेडों को यद आया कि रिजर्वेशन कोटा लागू नहीं और धर्मोन्मादी ध्रूवीकरण के  मुकाबला फिर बहुजन समाज  की याद बंगाल में भी मंडल बनाम कमंडल?

উগ্র হিন্দুত্ববাদের বিরুদ্ধে লড়াই করার শপথ নিতে ।

জাতপাত নিয়ে লড়াই করা দাঙ্গাবাজ বিজেপিকে পরাস্ত করা এবং তৃণমুল নামক জঙ্গি সংগঠন কে স্বমুলে নির্মুল করার শপথ নিতে আগামি ২৭শে ডিসেম্বর২০১৫ ।

বামফ্রন্টের ডাকে ব্রিগেড সমাবেশে দলে দলে যোগ দিন ।

आज का मनुष्यता और मेहनतकशों की दुनिया को मेरा यह संबोधन कोई एक्टिविज्म या सहिष्णुता असहिष्णुता बहस नहीं है।

हम अस्सी के दशक और नब्वे के दशक से शुरु आर्थिक सुधार,राजनीतिक  अस्थिरता, हत्याओं, कत्लेआम, त्रासदियों, निजीकरण,उदारीकरण ग्लोबीकरण,इस्लामोफोबिया,तेल युद्ध,संसदीयआम सहमति और सियासत के तमाशे की हरिकथा अनंत बांच रहे हैं आज अकादमिक और आफिसियल वर्सन के साथोसाथ नई पीढ़ियों के लिए खासकर।पढ़ते रहें हस्तक्षेप।छात्रों के लिए बहुत काम की चीज है।सुनते रहे हमारे प्रवचन मुक्ति और मोक्ष के लिए।


हमार दोस्त,हमार भाई कमल जोशी परगत भयो दीवाल पर आउर जमकश इक फोटो भोर के दागि रहिस,सो देख लिज्यो!

लिहिस कमल जोशीः

सुबह और तुम....!

कोटद्वार लौटा तो एक सुहाने आसमान ने बाहें फैलाई...!

कमल जोशी का प्रवचनः

साथियो,

बच्चों से बात करते हुए अभी कल ही ध्यान आया की उनकी सृजनशीलता को कैसे प्रस्फुटित किया जा सकता है...! वे एनर्जी से लबरेज़ हैं. अंग्रेजी स्कूल तो बच्चों को इसका मौक़ा दे देवते हैं, समर्थ परिवारों के बच्चों के अभिभावक उनकी होबी के खर्चे को अफ्फोर्ड कर सकते हैं...पर वो बच्चे जो अपनेआर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग से होते है क्या हम उनके लिए कुछ कर सकते हैं..चाहे कितना ही छोटा करें..पर हम क्या कर सकते है.?

ये जिक्र मैंने अपने बच्चो के साथ काम करने वाले साथियों से किया और उन्हे बताया की इस को मैं कैसे करना चाहता हूँ, तो न केवल वो सहमत हुए बल्कि एक ने तुरंत फेस बुक के लिए अपील/ पोस्ट तक तैयार कर मुझे भेज दी. . उसे बाँट रहा हूँ...! और आप राय दें की क्या ये संभव है...

"..फेसबुक एक ऐसा माध्यम है जिसकी सहायता से हम ना सिर्फ सामजिक रूप से जुड़ते है बल्कि सामाजिक सरोकारों में खासकर जिन्हें हमारी सहायता की जरूरत है उनकी मदद भी कर सकते है | बच्चे जो की किसी भी तबके के हो हमारा भविष्य है और हम बड़े अगर उनके जीवन में कुछ नया , आकर्षक और सीखने लायक चीजों से परिचय करा सके तो उन्हें नयी बातो का ज्ञान होगा और ना जाने कौन सी बात किसी को आगे बढ़ने की दिशा ही दिखा दे ? हम बच्चो के साथ , बच्चो के लिए कुछ काम करना चाहते है,

लेकिन रिसोर्सेस ना के बराबर है. लेकिन हमारा मानना है की कुछ करने के लिए पैसे से ज्यादा जज्बे की जरूरत होती है और मेरे ही जैसे मेरे कई मित्र होंगे जो ऐसा सोचते होंगे सो क्यों ना ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में बच्चो के साथ रहा जाये....कुछ वो हमसे सीखेंगे तो कुछ हम उनसे और बात बन जाएगी... बच्चो की रुचियों को ध्यान में रख आप में से जो भी मित्र कम से कम एक दिन का समय दे पाने के इच्छुक हो तो कृपया बताये की आप क्या सिखा सकते है लेकिन ये ध्यान रखे की हमारे पास सीखने आने वाले बच्चे नगर पालिका स्कूल के भी हो सकते है और मध्यमवर्गीय भी सो, best out of waste पर काम करना चाहेंगे.... खाने और रहने की व्यवस्था मिल जुल कर होगी. यदि आप कोटद्वार में आकर बच्चों के साथ अपनी आर्ट को बांटना चाहते हैं तो कृपया अपने बारे में और अपनी रूचि, जो की आप बच्चो को सिखाना चाहेंगे, सूचित करें.. ताकि अन्य मित्र भी जाने की कितने लोग ऐसे काम में रूचि रखते है लेकिन फोन नंबर इनबॉक्स देने की कृपा करे ताकि आपसे संपर्क और जानकारी ली या दी जा सके..... बच्चे हम जैसों के ज़ेहन में हमेशा से खिलखिलाते आये है सो सोचा क्यों ना इन्ही के साथ, अपना भी मन बहलाया जाये.....


गुजरो जो बाग़ से तो दुआ मांगते चलो ,

जिसमे खिले है फूल , वो डाली हरी रहे |"


मित्र का धन्यवाद की इतने सुन्दर शब्दों में मेरे दिल की बात लिख दी...मित्र इन्हें ही तो कह्ते हैं..



--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

Tuesday, December 1, 2015

Chennai submerged because we fail to learn the ABCD of disaster management because we tend to create all bloody calamities and opt for self destruction.We ,the Indians!

We claim to be digital India! We boast for campus  recruitment maounting millions of dollar to make us techno Super Power!


Chennai submerged because we fail to learn the ABCD of disaster management because we tend to create all bloody calamities and opt for self destruction.We ,the Indians!


Here you are!


My Tamilnadu! 


My Dravidnadu submerged into water.


Water logged Chennai!


Water logged Dravid Nadu where Dravid Self Respect had been immersed in special Cinema Effects!


The Tamilnadu which has nothing to do for the cause of suffering Dravid,Tamil Humanity and the Tamil Refugees and those who are stranded in Srilanka for biometric ethnic cleansing as we,the Indians are also habitual for biometric ethnic cleansing and infinite genocide culture.


https://youtu.be/tkefnIAXJds


पाकिस्तान की इस बच्ची ने जो कहा है उसे एक बार जरूर सुनें!#Extension Oil War #Reforms#IMF#World Bank #Mandal VS #Kamandal#Manusmriti

हम उनसे अलग कहां हैं हिंदू राष्ट्र बनकर भी हम क्यों बन गये पाकिस्तान,अमेरिका का उपनिवेश?

वेदमंत्र में हर मुश्किल आसान,हिंदुत्व एजंडा फिर क्यों मुक्त बाजार और सुधार पर  खामोशी क्यों समता और समामाजिक न्याय और हमारे नुमाइंदे क्यों खामोश?

बंगाल में 35 साल के राजकाज गवाँने के बाद कामरेडों को यद आया कि रिजर्वेशन कोटा लागू नहीं और धर्मोन्मादी ध्रूवीकरण के  मुकाबला फिर बहुजन समाज  की याद बंगाल में भी मंडल बनाम कमंडल?

উগ্র হিন্দুত্ববাদের বিরুদ্ধে লড়াই করার শপথ নিতে ।

জাতপাত নিয়ে লড়াই করা দাঙ্গাবাজ বিজেপিকে পরাস্ত করা এবং তৃণমুল নামক জঙ্গি সংগঠন কে স্বমুলে নির্মুল করার শপথ নিতে আগামি ২৭শে ডিসেম্বর২০১৫ ।

বামফ্রন্টের ডাকে ব্রিগেড সমাবেশে দলে দলে যোগ দিন ।

आज का मनुष्यता और मेहनतकशों की दुनिया को मेरा यह संबोधन कोई एक्टिविज्म या सहिष्णुता असहिष्णुता बहस नहीं है।

हम अस्सी के दशक और नब्वे के दशक से शुरु आर्थिक सुधार,राजनीतिक  अस्थिरता, हत्याओं, कत्लेआम, त्रासदियों, निजीकरण,उदारीकरण ग्लोबीकरण,इस्लामोफोबिया,तेल युद्ध,संसदीयआम सहमति और सियासत के तमाशे की हरिकथा अनंत बांच रहे हैं आज अकादमिक और आफिसियल वर्सन के साथोसाथ नई पीढ़ियों के लिए खासकर।पढ़ते रहें हस्तक्षेप।छात्रों के लिए बहुत काम की चीज है।सुनते रहे हमारे प्रवचन मुक्ति और मोक्ष के लिए।

Palash Biswas

Indian Express Reports:


Chennai under water, again

Chennai under water, again

The rains in Chennai have virtually broken a 100-year record with one day's rainfall covering a month's average. Tamil Nadu has announced holiday for schools and colleges while most of the factories and offices too closed. Residents of southern suburbs were the worst affected. When thousands of people who went to the city for work on Tuesday were stranded at different points en route after bus and train services stopped. Showers also lashed northern districts and Puducherry, disrupting flight movement and leaving several areas inundated. The meteorological office said the trough of low pressure was now over the southwest bay adjoining Sri Lanka off Tamil Nadu, and would bring more rain.


--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

पाकिस्तान की इस बच्ची ने जो कहा है उसे एक बार जरूर सुनें!#Extension Oil War #Reforms#IMF#World Bank #Mandal VS #Kamandal#Manusmriti हम उनसे अलग कहां हैं हिंदू राष्ट्र बनकर भी हम क्यों बन गये पाकिस्तान,अमेरिका का उपनिवेश? वेदमंत्र में हर मुश्किल आसान,हिंदुत्व एजंडा फिर क्यों मुक्त बाजार और सुधार पर खामोशी क्यों समता और समामाजिक न्याय और हमारे नुमाइंदे क्यों खामोश? बंगाल में 35 साल के राजकाज गवाँने के बाद कामरेडों को यद आया कि रिजर्वेशन कोटा लागू नहीं और धर्मोन्मादी ध्रूवीकरण के मुकाबला फिर बहुजन समाज की याद बंगाल में भी मंडल बनाम कमंडल? উগ্র হিন্দুত্ববাদের বিরুদ্ধে লড়াই করার শপথ নিতে । জাতপাত নিয়ে লড়াই করা দাঙ্গাবাজ বিজেপিকে পরাস্ত করা এবং তৃণমুল নামক জঙ্গি সংগঠন কে স্বমুলে নির্মুল করার শপথ নিতে আগামি ২৭শে ডিসেম্বর২০১৫ । বামফ্রন্টের ডাকে ব্রিগেড সমাবেশে দলে দলে যোগ দিন । आज का मनुष्यता और मेहनतकशों की दुनिया को मेरा यह संबोधन कोई एक्टिविज्म या सहिष्णुता असहिष्णुता बहस नहीं है। हम अस्सी के दशक और नब्वे के दशक से शुरु आर्थिक सुधार,राजनीतिक अस्थिरता, हत्याओं, कत्लेआम, त्रासदियों, निजीकरण


https://youtu.be/tkefnIAXJds


पाकिस्तान की इस बच्ची ने जो कहा है उसे एक बार जरूर सुनें!#Extension Oil War #Reforms#IMF#World Bank #Mandal VS #Kamandal#Manusmriti

हम उनसे अलग कहां हैं हिंदू राष्ट्र बनकर भी हम क्यों बन गये पाकिस्तान,अमेरिका का उपनिवेश?

वेदमंत्र में हर मुश्किल आसान,हिंदुत्व एजंडा फिर क्यों मुक्त बाजार और सुधार पर  खामोशी क्यों समता और समामाजिक न्याय और हमारे नुमाइंदे क्यों खामोश?

बंगाल में 35 साल के राजकाज गवाँने के बाद कामरेडों को यद आया कि रिजर्वेशन कोटा लागू नहीं और धर्मोन्मादी ध्रूवीकरण के  मुकाबला फिर बहुजन समाज  की याद बंगाल में भी मंडल बनाम कमंडल?

উগ্র হিন্দুত্ববাদের বিরুদ্ধে লড়াই করার শপথ নিতে ।

জাতপাত নিয়ে লড়াই করা দাঙ্গাবাজ বিজেপিকে পরাস্ত করা এবং তৃণমুল নামক জঙ্গি সংগঠন কে স্বমুলে নির্মুল করার শপথ নিতে আগামি ২৭শে ডিসেম্বর২০১৫ ।

বামফ্রন্টের ডাকে ব্রিগেড সমাবেশে দলে দলে যোগ দিন ।

आज का मनुष्यता और मेहनतकशों की दुनिया को मेरा यह संबोधन कोई एक्टिविज्म या सहिष्णुता असहिष्णुता बहस नहीं है।

हम अस्सी के दशक और नब्वे के दशक से शुरु आर्थिक सुधार,राजनीतिक  अस्थिरता, हत्याओं, कत्लेआम, त्रासदियों, निजीकरण,उदारीकरण ग्लोबीकरण,इस्लामोफोबिया,तेल युद्ध,संसदीयआम सहमति और सियासत के तमाशे की हरिकथा अनंत बांच रहे हैं आज अकादमिक और आफिसियल वर्सन के साथोसाथ नई पीढ़ियों के लिए खासकर।पढ़ते रहें हस्तक्षेप।छात्रों के लिए बहुत काम की चीज है।सुनते रहे हमारे प्रवचन मुक्ति और मोक्ष के लिए।

पलाश विश्वास

Sanjit Kumar Mondal's photo.


गौर करें कि 1991 के फर्स्ट स्ट्राइक और मरुआंधी से पहले 1988 में सलमान रश्दी के सैटेनिक वर्सेज बजरिये इस्लामोफोबिया।उससे पहले याद करें अफगानिस्तान में सोवियत संघ का आत्मघाती हस्तक्षेप और तालिबान का सृजन,लहुलूहान पंजाब और असम और त्रिपुरा और इसी प्रसंग में चंद्रशेखर के शासनकाल में भुगतान संतुलन संकट और विश्वबैंक,मुद्राकोष के तमाम आंकड़े और शर्ते ,जिसके मुताबिक तब से लेकर अब तक वैश्विक वित्तीयसंस्तानों के हवाले भारत की राजनीति,अर्थव्यवस्था,आस्था और धर्म।

गौर करें 1971 का बांग्लादेश युद्ध,समाजवादी माडल और निर्गुट आंदोलन,सोवियत बारत मैत्री और सत्तर का दशक।


फिर याद करें,आपरेशन ब्लू स्टार,इंदिरा गांधी की हत्या और सिखों का नरसंहार,राममंदिर आंदोलन का शंखनाद,राजीव का राज्याभिषेक,श्रीलंका में हस्तक्षेप,फिर राजीव की निर्मम हत्या और अमेरिकी परस्त ताकतों का उत्थान हिंदुत्व का पुनरूत्थान।


याद करें हरितक्रांति,भोपाल गैस त्रासदी,बाबरी विध्वंस,आरक्षण विरोधी आत्मदाह आंदोलन और राजनीतिक अस्थिरता,अल्पमत सरकारों का संसदीय सहमति से पूंजी बाजार के हित में आर्थिक सुधार कार्यक्रम का पूरा टाइमलाइन 1991 से जो तेलयुद्ध का विस्तार है और भारत जिस वजह से अनंत युद्धस्थल है और हिंदुत्व की वैदिकी संस्कृति के नाम धर्म के नाम अधर्म की जनिविरोधी बेदखली नरसंहार संस्कृति का बेलगाम अस्वमेध और राजसूय।


आज का मनुष्यता और मेहनतकशों की दुनिया को मेरा यह संबोधन कोई एक्टिविज्म या सहिष्णुता असहिष्णुता बहस नहीं है।

हम अस्सी के दशक और नब्वे के दशक से शुरु आर्थिक सुधार,राजनीतिक  अस्थिरता, हत्याओं, कत्लेआम, त्रासदियों, निजीकरण,उदारीकरण ग्लोबीकरण,इस्लामोफोबिया,तेल युद्ध,संसदीयआम सहमति और सियासत के तमाशे की हरिकथा अनंत बांच रहे हैं आज अकादमिक और आफिसियल वर्सन के साथोसाथ नई पीढ़ियों के लिए खासकर।


पढ़ते रहें हस्तक्षेप।

छात्रों के लिए बहुत काम की चीज है।

सुनते रहे हमारे प्रवचन मुक्ति और मोक्ष के लिए।


यह विशुद्ध प्रोपेशनल जर्नलिज्म है हालांकि मैं एक मामूली सबएडीटर हूं लेकिन इंडियन एक्सप्रेस समूह के संपादकीय डेस्क से मैंने यह दुनिया पल पल बदलते बिगड़ते देखा है तो दैनिक जागरण और दैनिक अमर उजाला में बाकायदा डेस्क प्रभारी बतौर कमसकम आठ साल और,कुल 35 साल यानी सत्तर और अस्सी के दशक का खजाना मेरे पास है।


आपको कोई खुल जा सिम सिम कहना नहीं है।


1980 में हमने जब पत्रकारिता शुरु की,तब जो बच्चा पैदा हुआ,मेरे रिटायर करते वक्त वे 36 साल के हो जाेंगे।जो तब 12 साल का था टीन एजर भी न था,उसकी उम्र 48 साल होगी।


इन तमाम लोगों और लुगाइयों को दिमाग में रखकर मैंने आज आर्थिक सुधार,विश्वबैंक और आईएमएफ के नौकरशाहों के हवाले भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था,बाबासाहेब के संविधान की ऐसी की तैसी ,कानून की राज की ऐसी की तैसी,भारतीयगणतंत्र और लोकगणराज्य की ऐसी की तैसी,समता और सामाजिक न्याय की ऐसी की तैसी का फूल नजारा राज्यसभा टीवी के सौजन्य से ताजा ग्लोबल देसी अपडेट के साथ साथ,रिजर्व बैंक के गवर्नर और भारत के वित्त मंत्री के उच्चविचार के साथ साथ फूल अकादमिक डिस्कासन Economic reforms in India,IMF,world bank,1991 के साथ साथ संसद शीत सत्र लाइव के साथ मध्यपूर्व से लेकर दुनिया के हर कोने पर नजर,नेपाल में भारत के हस्तक्षेप,आर्थिक नाकेबंदी,मौसम की चिंता,मानसरोवर में गंगा के उद्गम और भारत से बेदखल हिमालयके रिसते जख्मों,सूखते मरुस्थल में तब्दील होते ग्लेशियरों के साथ जस का तस कमंडल बनाम मंडल गृहयुद्ध और तेल युद्ध के विस्तार भारत युद्धस्थल का विजुअल पोस्टमार्टम पेश किया है।


कल बहुत जटिल लिखा था।अमलेंदु तक को बहुतै तकलीफ हुई और आज शाम को कल दिन में लिखा वह साझा कर सका।उसका धन्यवाद और अभिषेकवा का भी धन्यवाद की सुबोसुबो गू का छिड़काव हम कर रहे हैं विशुद्धता के तंत्र मंत्र यंत्र तिलिस्म  पर।


बुरा मत मानिये हम फिर वहीं नबारुणदा हर्बर्ट हैं या फैताड़ु बोंहबाजाक हैं,जिसके बारे में हमने खुलासा किया है।हमारा लिखा रवींद्र का दलित विमर्श भी नहीं है न दलितआत्मकथा गीतांजलि है।

आज जियादा पादै को नहीं है।


पाकिस्तान की बिटिया ने जो करारा प्रहार पाकिस्तान की इकोनामी और राजनीति,अमेरिकापरस्ती पर किये हैं,उसके आगे उस बिटिया को सलाम कहने के अलावा कोई चारा नहीं है।आप हमारा वीडियो भले न देखें,पाकिस्तान की उस बिटिया जिंदाबाद जिंदाबन को जरुर सुन लेना और वीडियो से बाहिर निकल आना,यही निवेदन है।


पांचजन्‍य में नोबेल लारिटवा का इंटरव्यू बांचि  लेब तो रमाचरित मानस का कहि वेद उद सब भूलि जाई।सबसे पहिले हमारे मेले में बिछुड़वला बानी सगा भाई अभिषेक ने इसे ससुरे जनपथ पर हग दिहिस तो हमउ छितरा दिहल का,समझ जाइयो।पूरा इंटर ब्यू हम दे नाही सकत।नौबेल लारिटवा के उद्गार में चूं चूंकर जो सहिष्णुता ह ,वही इस देश का सामजिक यथार्थ है और विद्वतजनों का ससोने में मढ़ा गढ़ा चरित्रउ।विस्तार से हमउ लिखल रहल बानी,देखत रह हस्तक्षेप आउर हमार तमामो ब्लाग।


शांति के लिए नोबल पुरस्‍कार मिलने के बाद कैलाश सत्‍यार्थी की सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया बेहद कम देखने में आई है। इधर बीच उन्‍होंने हालांकि राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्‍य को एक लंबा साक्षात्‍कार दिया है जो 9 नवंबर को वहां प्रकाशित हुआ है। उससे दो दिन पहले बंगलुरु प्रेस क्‍लब में उन्‍होंने समाचार एजेंसी पीटीआइ से बातचीत में कहा था कि देश में फैली असहिष्‍णुता से निपटने का एक तरीका यह है कि यहां की शिक्षा प्रणाली का ''भारतीयकरण'' कर दिया जाए। उन्‍होंने भगवत गीता को स्‍कूलों में पढ़ाए जाने की भी हिमायत की, जिसकी मांग पहले केंद्रीय मंत्री सुषमा स्‍वराज भी उठा चुकी हैं।

पांचजन्‍य का पहिला सवालः

नोबल पुरस्कार ग्रहण करते समय आपने अपने भाषण की शुरुआत वेद मंत्रों से की थी। इसके पीछे क्या प्रेरणा थी?

जवाब में नोबेल लारिटवा का यह उद्गारः

शांति के नोबल पुरस्कार की घोषणा के बाद जब मुझे पता चला कि भारत की मिट्टी में जन्मे किसी भी पहले व्यक्ति को अब तक यह पुरस्कार नहीं मिल पाया है तो मैं बहुत गौरवान्वित हुआ। अपने देश और महापुरुषों के प्रति नतमस्तक भी। मैंने सोचा कि दुनिया के लोगों को शांति और सहिष्णुता का संदेश देने वाली भारतीय संस्कृति और उसके दर्शन से परिचित करवाने का यह उपयुक्त मंच हो सकता है। मैंने अपना भाषण वेद मंत्र और हिंदी से शुरू किया। बाद में मैंने उसे अंग्रेजी में लोगों को समझाया। मैंने

संगच्छध्वम् संवदध्वम् संवो मनांसि जानताम्

देवा भागम् यथापूर्वे संजानानाम् उपासते!!

का पाठ करते हुए लोगों को बताया कि इस एक मंत्र में ऐसी प्रार्थना, कामना और संकल्प निहित है जो पूरे विश्व को मनुष्य निर्मित त्रासदियों से मुक्ति दिलाने का सामर्थ्य रखती है। मैंने इस मंत्र के माध्यम से पूरी दुनिया को यह बताने की कोशिश की कि संसार की आज की समस्याओं का समाधान हमारे ऋषि मुनियों ने हजारों साल पहले खोज लिया था। बहुत कम लोग जानते होंगे कि मैंने विदेशों में भारतीय संस्कृति और अध्यात्म पर अनेक व्याख्यान भी दिए हैं। मेरे घर में नित्य यज्ञ होता है। पत्नी सुमेधा जी ने भी गुरुकुल में ही पढ़ाई की हुई है।


--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

1400 hundred starving workers of Bengal tea Gardens succumbed!


১৭টি বন্ধ চা বাগানের ১৪০০ শ্রমিক (আনুমানিক) মারা গেছেন অনাহার আর অপুষ্টিতে!

1400 hundred starving workers of Bengal tea Gardens succumbed!

২০০০ থেকে ২০১৫ – ১৭টি বন্ধ চা বাগানের ১৪০০ শ্রমিক (আনুমানিক) মারা গেছেন অনাহার আর অপুষ্টিতে। আমাদের সহ নাগরিকেরা খেতে না পেয়ে মারা যাচ্ছেন; আরও কত আগুনিত চা-শ্রমিক অর্ধাহারে-অনাহারে দিন কাটাচ্ছেন আর একটু একটু করে এগিয়ে চলেছে্ন এক বেদনাদায়ক নিশ্চিত মৃত্যুর দিকে, আমরা জানি না। কিন্ত আমরা কি শুধুই দেখবো আর চায়ের পেয়ালায় তুফান ছুটিয়ে আলোচনায় মগ্ন থাকবো? নাকি এদের এই ভয়ঙ্কর বিপদের দিনে তাদের পাশে দাঁড়াবো? বন্ধুরা – আমাদের পথ দেখান। আপনাদের নির্দিষ্ট মতামত জানান। আপনাদের দেওয়া উপদেশগুলিকে একত্রিত করেই আমরা আমাদের ভবিষ্যৎ কার্যক্রম ঠিক করবো। আপনাদের উপদেশের অপেক্ষায় "মানুষের সাথে মানুষের পাশে"-র এডমিন টিম।

বিঃদ্রঃ সবাকার কাছে অনুরধ, দয়া করে আপনাদের অভিমত/উপদেশগুলি কমেন্ট করুন। শুধু লাইক করবেন না।


--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!